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Pitru Puja – Honor Your Ancestors and Seek Their Blessings
Pitru Puja – Honor Your Ancestors and Seek Their Blessings Price range: ₹7,000.00 through ₹12,500.00

shimad bhagbat mul parayan

31,000.00

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Description

वैष्णव धर्म के सर्वोत्तम ग्रंथों में श्रीमद्भागवत महापुराण का स्थान अत्यंत उच्च है। यह ग्रंथ परम पवित्र और दिव्य कथाओं से परिपूर्ण है। श्रीमद्भागवत का प्रवचन विभिन्न भाषाशैलियों और शैलीगत विविधताओं से सम्पन्न है। इसमें कहीं वैदिक शब्दावली का समावेश है, तो कहीं दर्शन, काव्य, और ऐतिहासिक दृष्टिकोणों का समन्वय। इस ग्रंथ को पारमहंस संहिता के नाम से भी जाना जाता है।

पुराण के पाँच मुख्य लक्षण हैं:

  • सर्ग: सृष्टि का प्रारंभ।
  • प्रतिसर्ग: प्रलय के बाद पुनः सृष्टि की उत्पत्ति।
  • वंश: राजाओं और महान आत्माओं का वर्णन।
  • मन्वंतर: मनु के युग और उनका कालखंड।
  • वंशानुचरित: वंश का इतिहास।

श्रीमद्भागवत महापुराण इन पाँचों के अतिरिक्त दस लक्षणों से युक्त है, जो इसे विशिष्ट बनाते हैं: सर्ग, विसर्ग, स्थिति, पोषण, ऊति, मन्वंतर, ईशानुचरित, निरोध, मुक्ति और आश्रय। यह ग्रंथ केवल ऐतिहासिक या दार्शनिक विवरण नहीं देता, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की अनंत कृपा और भक्ति का आदर्श स्थापित करता है।

श्रीमद्भागवत में भक्ति मार्ग को मुख्य साधन बताया गया है, जो सभी वर्गों और युगों में मोक्ष का सरलतम उपाय है। इसमें नवधा भक्ति का वर्णन मिलता है:

  1. श्रवण: भगवान की लीलाओं को सुनना।
  2. कीर्तन: भगवान का गुणगान करना।
  3. स्मरण: भगवान का ध्यान करना।
  4. पादसेवन: भगवान की सेवा करना।
  5. अर्चन: पूजा-अर्चना करना।
  6. वंदन: भगवान को प्रणाम करना।
  7. दास्यभाव: भगवान की सेवा को अपना कर्तव्य मानना।
  8. सख्यभाव: भगवान को मित्र मानना।
  9. आत्मनिवेदन: स्वयं को भगवान को अर्पित करना।

कलियुग में, भक्ति ही वह शक्ति है जो पाप बंधनों को काट सकती है। श्रीमद्भागवत महापुराण कलियुग के लिए वरदानस्वरूप है। यह ग्रंथ अद्वितीय रूप से भक्तों के लिए मोक्ष का मार्ग प्रस्तुत करता है।

भगवान वेदव्यास ने इस ग्रंथ को अष्टादशसाहस्री पारमहंसी संहिता कहा है, क्योंकि यह अठारह हजार श्लोकों में विभक्त है। इसमें बारह स्कंध हैं, जो मानव जीवन के लिए गहन ज्ञान, भक्ति, और वैराग्य के पाठ प्रस्तुत करते हैं।  यह दिव्य ग्रंथ वह सुधारस है, जो साधक को जीवन की अशुद्धियों से मुक्त करता है। इसका श्रवण, पठन, और मनन करने से न केवल मनुष्य के पाप और संताप मिटते हैं, बल्कि वह भगवान श्रीकृष्ण के अनंत सान्निध्य को प्राप्त करता है।

श्रीमद्भागवत का प्रत्येक श्लोक मोक्ष का द्वार खोलता है और जीवन को परमात्मा की ओर उन्मुख करता है।” 

श्रीमद्भागवत महापुराण का महत्व और महिमा असीम है। यह अनुपम ग्रंथ उन वैष्णव जनों के लिए एक अमूल्य साधन है, जो माया और मोह के बंधनों को समाप्त कर भगवत्कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। इसकी कथा भगवान श्रीकृष्ण के नाम, रूप, लीला और धाम के प्रति प्रेम को जागृत करती है।

  • माया और मोह का नाश: यह पुराण जीवन के सभी सांसारिक भय और बंधनों को समाप्त कर आत्मा को शांति और परम ज्ञान प्रदान करता है।
  • भक्ति का उद्गम: श्रीमद्भागवत भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्वितीय संगम है। भक्ति की प्राप्ति के साथ ज्ञान और वैराग्य स्वयं उत्पन्न होते हैं।
  • भगवान का तेज: यह ग्रंथ भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात तेज और वाङ्मय स्वरूप है, जिसे उन्होंने अपने स्वधाम गमन से पूर्व इस संसार में स्थापित किया।
  • सर्वश्रेष्ठ पुराण: पुराणों में यह सर्वोच्च स्थान रखता है, जैसे गंगा नदियों में, अच्युत देवताओं में और भगवान शंकर वैष्णवों में श्रेष्ठ माने जाते हैं।
  • मोक्ष का मार्ग: तप और योगमार्ग कलियुग में दुर्लभ और कठिन हो गए हैं, लेकिन भक्ति के माध्यम से हर कोई भगवत्सान्निध्य को प्राप्त कर सकता है।
  • अतुलनीय कथा: इसकी कथा केवल भौतिक संसार से मुक्ति नहीं देती, बल्कि परम आनंद और भगवत्साक्षात्कार का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
  • सर्वलोकप्रियता: यह ग्रंथ देवताओं के लिए भी दुर्लभ है और मान्यता है कि यह उन्हें भी आत्मिक संतोष और मोक्ष प्रदान करता है।
  • शुद्धिकरण और पुण्य: इसका श्रवण, पठन और मनन करने से जीवन शुद्ध, पवित्र और मंगलमय हो जाता है।

श्रीमद्भागवत का सार:
यह ग्रंथ भक्तों के लिए अमृतस्रोत है। जिस प्रकार गंगा का जल सब पापों का नाश करता है, उसी प्रकार श्रीमद्भागवत की कथा आत्मा के सभी संतापों का अंत कर देती है।

निम्नगानां यथा गङ्गादेवानामच्युतो यथा।
वैष्णवानां यथा शम्भुःपुराणानामिदं तथा।।

अर्थ:
जिस प्रकार नदियों में गंगा, देवताओं में श्रीकृष्ण और वैष्णवों में भगवान शिव श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार पुराणों में श्रीमद्भागवत महापुराण सर्वश्रेष्ठ है

श्रीम‌द्भागवत् महापुराण मूल पाठ पारायण में होने वाले प्रयोग या विधि:-

  1. स्वस्तिवाचन एवं शान्तिपाठ
  2. प्रतिज्ञा सङ्कल्प
  3. गणपति गौरी पूजन
  4. कलश स्थापन एवं वरुणादि देवताओं का पूजन
  5. पुण्याहवाचन एवं मन्त्रोच्चारण अभिषेक
  6. षोडशमातृका पूजन
  7. सप्तघृतमातृका पूजन
  8. आयुष्यमन्त्रपाठ
  9. सांकल्पिक नान्दीमुखश्राद्ध (आभ्युदयिकश्राद्ध)
  10. नवग्रह मण्डल पूजन
  11. अधिदेवताप्रत्यधिदेवता आवाहन एवं पूजन
  12. पञ्चलोकपाल,दशदिक्पालवास्तु पुरुष आवाहन एवं  पूजन 
  13. रक्षाविधान 
  14. प्रधान देवता पूजन
  15. विनियोग,करन्यासहृदयादिन्यास
  16. ध्यानम्स्तोत्र पाठ
  17. पंचभूसंस्कारअग्नि स्थापनब्रह्मा वरणकुशकण्डिका
  18. आधार-आज्यभागसंज्ञक हवन
  19. घृताहुतिमूलमन्त्र आहुतिचरुहोम
  20. भूरादि नौ आहुति स्विष्टकृत आहुतिपवित्रप्रतिपत्ति
  21. संस्रवप्राशनमार्जनपूर्णपात्र दान
  22. प्रणीता विमोकमार्जनबर्हिहोम 
  23. पूर्णाहुतिआरतीविसर्जन
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